अंटार्कटिका की यात्रा भगा 3

हमारे अभियानों में आस्सक्लास जहाज किराए पर लिये जाते हैं । ये किसी भी देश कै ठो सकते हैं, स्सलिए इनका घालक दल विदेशी ही होता है । आधुनिक जहाज तैरते हुए सितारा-होटलों की तरह होते हैं । इनमें जहाज कै पिछले हिस्से मॅ एक बहुमंजिली इमारत बनी होती हैं…प्राय: पॉच या छा मजिल ऊँची । सबसे ऊपर की मंजिल पर जहाज का चफ्लानडकक्ष होता हैं और नीचे क्री मजिर्लो पर रहने कै लिए कमरे बने होते हैं । एक कमरे में सामान्यत: दो सदस्यों को ठहराया जाता है । सबसे नीचे कै तल पर डायनिंग हॉल’ होता है और कुछ जहाजों में उसर्क भी नीचे कसरत कै लिए एक कमरा, एक छोटा सा स्विमिंग पूल तथा भाप-स्नान कै लिए ‘सॉना’ बना होता है । जहाजों में खाने-पीने की व्यवस्था प्राय: बहुत अच्छी होती है, कभी-कभी हीँ कुछ जहाजों में कोई शिकायत आती है । आपका कमरा जितना ऊपर होगा उतना ही अच्छा दृश्य तो दिखेगा, पर जहाज कै डोलने से उतनी ही ज्यादा परेशानी भी होमी! इन जहाजों की सामान्य गति 20-25 किलोमीटर प्रति घंटे की होती है । इस तरह जहाज दिन भर में लगभग 500-600 किलोमीटर क्री दूरी तय कर लेता है । कैपटाउन से चलने कै कुछ ही घंटे बाद जमीन का दिखना चंद हो जात्ता है । फिर होता है दूरु-दूरु तक बस नीला थानी…-ही-पानी ! जो सदस्य पहली चार पानी कै जहाज से सफर कर रहे हैं, उनकै लिए यह एक खूबसूरत नजारा होता है । पर इस सुंदर दृश्य का आनंद लेने र्क लिए कैवल दो दिन का ही समय मिलता है, ठसर्क बाद जहाज पहुंच जाता है 40 डिग्री दक्षिण की सीमा कै भीतर ।

इस चाल्पीसे में सबकुछ आपकी किस्मत पर निर्भर करता है ! यह कभी-कभी तो बिना कुछ बोले हुए जहाज क्रो निकल जाने देता है, पर ऐसा बहुत कम ही होता है । सामान्यत्त: यह विकराल लहरों का क्षेत्र है, हिंद महासागर कै गरम पानी और अंटार्कटिक महासागर र्क ठंडे पानी कै आपस में मिलने का` इलाका । अधिकशि मामलों में यह गुजरते हुए किसी भी जहाज को ऐसा झूला झुलाता है कि सारे यात्री पस्त हो जाते हैं ! लोगों की भूख तो खत्म हो ही जाती है, कुछ को उल्टियाँ होती रहती हैं, कई बिस्तर पकड़ लेते -हैं त्तो छोड़ते ही नहीं, कमरे में सामान उलट-पलट होकर गिरता रहता है, डायनिंग हॉल में प्लेटें टूटकर बिखर जाती हैं और अकसर तो टीम कै डॉक्टर साहब भी इतनी खराब हालत में होते हैं कि आपकी ही जाकर उनका हाल पूछना पड़ता है ! इस चास्तीसे में कुछ सदस्य तो कसमें खालेते हैं कि अब आगे कभी अंटार्कटिका आने का नाम भी नहीं लेंगे ! !

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