अंटार्कटिका में भारत भाग 3

आजकल भारतीय दल कै चंयन को प्रक्रिया फरवरी में आरंभ हो जाती है । महासागर विकास विभाग द्वारा गोवा में स्थापित अंटार्कटिक केंद्र

देश कै सभी प्रमुख अख़बारों में सूचना प्रकशित करता है और अंटस्कीटिफा , में शोध कार्यों फे लिए प्रस्तख आमंत्रित करता है । बिज्ञान कै किसी भी क्षेत्र में कार्य करने कै लिए रिसर्च प्रोजेक्ट यहाँ भेजे जा सकते हैं । यह व्यक्तिगत प्रोजेक्ट भी हो सकते हैं, पर किसी वैज्ञानिक विभाग था किसी विश्वविद्यप्लय से प्रस्ताव भेजने पर जाने वरीयता दी जाती है, वर्योंकि इसमें कार्य को घूरा करने का उत्तरदायित्व उस विभाग का भी हों जाता है । इसी तरह एक साल कै छोटे से कार्य क्री जगह”. दोडत्तीन वर्ष में विस्तार से किसी अनुसंधान कै त्रिथिन्न पहलुओं को पूरा करने कै प्रस्ताव को भी वरीयता दो जाती है । प्रोजेक्ट को भेजने कै पहले यह जान लेना बेहतर होता है कि इन क्षेत्रों में अभी तक क्या काम हो चुका है । यह जानकारी हर साल कै अभियानों की प्रकाशित ‘रिपोर्ट से प्राप्त को जा सकती है । रिपोर्ट से बिथिम्म संदर्भ एकत्र करने का कार्य गोवा ” या दिल्ली में निम्म पतों पर किया जा सकता हैं…

र्कद्र निदेशक

राष्टीय अटार्कटिक एवं समुद्रो अनुसंधान केंद्र

हैड लैंड सडा वास्को दा गामा

‘गोवा-403 804

अथवा

निदेशक अंटार्कटिका

महासागर विकास विभाग

ब्लकिं 12, स्री॰जी.ओ. कॉफ्लेक्स

लोदी रोड, नई दिल्लीडा 10 003

इसवी अतिरिक्त भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग का ‘अंटार्कटिका प्रमागं दिल्ली कै पास ही फ़रीदाबाद में स्थित है । यह विभाग पहले अभियान सै लेकर अब तक हर अनुसंधान में भाग लेता रहा है । इस कारण स्म कायक्तिथ में अनेक अनुभवी वैज्ञानिक हैं, जो अंटार्कटिका कै बारे में किसी सी तरह की जानकारी दे सकते हैं । यहाँ पर भी अंटार्कटिका कै पल्ले अमिथग्न से लेकर अथ तक प्रकाशित सभी रिपोर्टें उपलब्ध हैं । फ्लो क्या यहाँ पर भारत का एकमात्र ‘अंटाकोंटेक संग्रहालय’ भी क्या हुआ है. जिसमें अंटश्यष्टिका पो बारे में विविध जानकारियां एक ही स्थान पर क्ति णासी है । स्म संयहफ्लाय की स्थद्रपना मीघवें अभियान कै लीडर श्री एस्कफ्रें. कौल ने की यी और तम से स्समॅ निरंतर नए नमूने

ध फोटो आदि जोडे जाते रहे हैं । स्म विभाग का पता है” भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण अंटाकौटेका प्रभाग एनं-ए’त्र. 5 पो, एनआईटी. . फुरीदस्वाद्रश्ले। 2। ०0।

अंटार्कटिक अभियानों में जानेवाले दल कै दो हिस्से होते हैं-‘समर’ और ‘विंटर’ टोम । जब हमारे यहाँ दिसंबर-जनवरी में ठंड पड़त्ती है तो वह दक्षिणी गोलार्ध में गरमी कौ ऋतु होती है । “इसलिए जहाज हर साल दिसंबर में रचाना होता है और मार्च में जब अंटार्कटिक महासागर जमना शूरू हो जाता है तो वापस लौट आत्ता है । चुनी गई पूरी टीम ‘लाभग 5०८55 सदस्यों को होती है । जो सदस्य जहाज कै साथ दिसंबर मॅ जाकर जहाज कै साथ ही माचं में लौट आते हैं, वे 4 महीने को समर टोम कै सदस्य होते हैं । जहाज र्क लौटते समय टीम कै 25 लोग भारतीय स्टेशन ‘मैत्री’ पर . रुक जाते हैं साल भर कै लिए, जो अगले’ मार्च ,में बापस लौटेंगे: ये लोग 16 महीने क्रो विंटर टीम कै सदस्य हौते हैं । इस तरह रिसर्च प्रोजेक्ट या तो 4 महीने र्क लिए दिए जा सकते हैं या फिर 1 हे महीने कै लिए। ‘ ‘ ‘

दो…त्तीन महीने में हर तरह कै रिसर्च प्रोजेक्ट जमा हो जाने कै बाद इनकी समीक्षा क्री जाती है । इनकी छेंटनी कै बाद जो -प्रस्ताव आगे जॉच कै योग्य समझे जाते हैं, उन्हें जून…जुस्ताई में गोवा में विशेषज्ञों की एक समिति कै आगे अपने प्रोजेक्ट विस्तार से प्रस्तुत करने कै लिए बुलाया जाता है । इस पर उनसे तरह-तरह कै सवाल पूछे जाते हैं । मुख्य रूप से प्रस्तावक को यह बताना होता है कि वह अटार्कटिका में क्यस्ना अनुसंधान करना चाहता है १ यह पहले किए गए कार्य से किस तरह मिन्न होगा १ बिज्ञान कै उस क्षेत्र मॅ यह क्या मर्द जानकारी प्रदान करेगा; और इस कार्य को अंटार्कटिका में ही क्यों किया जा सकता है, किसी अन्य ठंडे स्थान पर क्यों नहीं १ यदि विशेषज्ञ समिति इन प्रस्तत्वों का अनुमोदन कर देती है तो वह प्रोजेक्ट स्वीकृत हो जाता है ।

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