अंटार्कटिका में भारत भाग 5

अवतूबर में व्यक्तिगत भारी सामान या वैज्ञानिक उपकरण गोवा कै अंटार्कटिक केंद्र में जमा कराने का समय होता है 1 सन् 1999 तक भारत र्क सारे अभियान दिसंबर र्क महीने में गोवा से ही मानी कै जहाज पर सवार होते थे, तब सामान जमा कराने की यह कार्यवाही नहीं होती थी । सदस्य सीधे ही अपने हलक-भारी सभी सामानों कै साथ गोवा आ जाते थे और उरी जहाज पर लादकर रवाना हो जाते ये 1 यहीँ से अंटार्कटिका करीब 12,00० किलोमीटर दूर पडता था और जहाज को यह दूरी पार करने में लगभग 26 या 27 दिन लग जाते थे । इस तरह पानी की यह यात्रा लगभग एक महीने की होती थी, जिसमें जहाज कै किराए पर भी मारी खर्च आता था । उम्मीसवें अभिमान से इसमें एक सुधार किया गया 1 हमारे अभियान दक्षिण अफ्रीका कै ‘कैपटाउन’ शहर से जहाज पर सवार होने लगे । इसकै लिए भारी सामान को किसी भी मप्लवाहक जलयान से

एक महीना पहले ही रचाना कर दिया जाता है, ताकि टोम कै आने तक सामान वहाँ पर पहुंच चुका दो ।

नवंबर कै महीने मॅ पासपोर्ट तथा बीसा आदि लेने की प्रक्रिया आरंभ हो जाती हैं । महासागर विकास विभाग कै पत्र र्क आधार पर सदस्य सरकारी पासपोर्ट कै लिए आवेदन दे सकते हैं । जिनर्क व्यक्तिगतं पासपोर्ट (नीले रंग कै) बने हुए हैं, उम्हें इस यात्रा कै लिए इन्हें पासपोर्ट आँफिस में जमा कराकर सरकारी पासपोर्ट(सफेद रंग) कै लिए आवेदन देना होता है । पासपोर्ट बन जाने कै बाद दिल्ली में महासागर विकास विभाग में बीसा र्क लिए फॉर्म भरकर उसे इस पासपोर्ट कै साथ जमा करां दिया जात्ता है । बीसा लेने की कार्यवाही विभाग स्वयं करता है । अंटार्कटिका पर किसी देश का अधिकार नहीं है, वहॉ पासपोर्ट की कोई जरूरत नहीं है; पर देश से चाहर जाते समय भारत कै नागरिक की तरह अपनी पहचान कै लिए पासपोर्ट होना आवश्यक है, इसलिए गोवा से सीधे जाते समय भी पासपोर्ट बनता था । अब तो चूँकि हम दक्षिण अफ्रीका होते हुए यात्रा करते हैं इसलिए पासपोर्ट तथा उस देश का बीसा दोनों ही आवश्यक हो गए हैं ।

सारी तैयारियों पूरी होने क बाद सदस्यों क्रो दिसंबर में गोवा पहुँचने की एक तारीख दे दो जाती हैं । अब यहाँ से हवाई यात्रा करनी होगी इसलिए साथ में कैवल 30 किलो सामान ले जाने को अनुमति है । गोवा में सदस्यों को विदेशी मुद्रा खरीदने को सुविधा दो जाती है । पंजिम में स्थित ‘फायर कॉलेज’ में अंटार्कटिका कै एक सबसे बडे खतरे, यानी अग्य, से बचने र्क लिए प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाता है । कुछ विशेषज्ञों की वात्तर्मेओं द्वारा स्वास्थ्य आपसी व्यवहार सामूहिक कार्य आदि कै बारे में आखिरी हिदायतें दी जाती हैं । और फिर, एक समारोह में अथियन्न को बिदाई दीं जाती है ।

गोवा से मुंबई की हवाई यात्रा में एक घंटे का समय लगता है, जिसे सारी टीम विदाई कै दिन की शाम को घूरा कर लेती है । मुंबई में घरेलू स्वाई अड्डे से अंतरराष्टीय अड्डे तक जाने में और वहाँ उडान कै पहले की औपचारिकताओं को घूरा करने में चार-पॉघ घंटे लग जाते हैँ । लगभग आधी रात कै समय बिमान अभियान दल को लेकर दक्षिण अफ्रीका में ‘जोहानेसबर्ग’ कै लिए रवाना होता है । करीब आठ घंटे की इस उडान कै बाद जोहानेसबर्ग मै भी घरेलू स्वाई अड्डे पर जाकर निमग्न पदलना ढोता है । वहाँ से दो घंटे की स्वाई यात्रा कै चाद टोम

केपटाउन पहुंच जाती है । अंटार्कटिका जानेवाला जहाज यरेपटाउन मॅ सामान लाद रहा होता हैं और सामान्यत: सदस्यों को सीधे जहाज पर ले जाया जस्ता है 1 यदि जहाज कै आने मॅ किसी कारण से विलंब हुआ तो टोम फो किसी होटल में ठहरा दिया जात्ता है ।

सामान कै लदान कै साथ ही यहॉ से आखिरी बार ताजा सब्जियां और मल्ल खरीदे जाते हैं, जो जहाज कै बडे कोल्ड स्टोरेज में करीब एक महीने तक सुरक्षित रखे रहते हैं । दो हैलीकॉप्टर जहाज कै सामान रखने की ‘होल्ड’ में सँभालकर बाँध दिए जाते हैं । फिर एक विशेष समारोह आयोजित करर्क यहाँ से अभियान क्रो अंतिम रूप से विदा किया जाता है । अब अंटार्कटिक केंद्र तथा भारतीय दूतावास कै ,सारे अफसर वापस लौट जाते हैं । इसर्क बाद से सारी जिम्मेदारी अभियान कै लीडर को होती है । चाहे काम विदेशो जहाज कै कप्तान या हैलीकॉप्टर पायलटों से समन्वय स्थापित करना हो या भारत सरकार को कोई महत्त्वपूर्ण सूचना देनी हो, अभियान र्क कार्यो की विस्तार से योजना बनानी हो या सदस्यों कै खाने-पीने कै सामान अथवा नहाने कै पानी ‘जैसी मामूली समस्या हो, अब त्तो लीडर ही होता है ‘पीर-बाबचीं-थिरत्ती-खर’ !

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